✍ अहल-ए-दिल (धर्मपरायण लोगों) को तड़पा देने वाले अश्आर (शेर)...
Ummah Post
13 January, 2025

✍ अहल-ए-दिल (धर्मपरायण लोगों) को तड़पा देने वाले अश्आर (शेर)!

रह के दुनिया में बशर (मनुष्य) को नहीं ज़ेबा (उचित) ग़फ़लत,

मौत का ध्यान भी लाज़िम (अनिवार्य) है कि हर आन (पल) रहे।

जो बशर आता है दुनिया में ये कहती है क़ज़ा (मौत/भाग्य),

मैं भी पीछे चली आती हूँ ज़रा ध्यान रहे।

(यह अश्आर हज़रत हकीमुल उम्मत हज़रत थानवी ؒ की ख़ानक़ाह में लिखे हुए थे)

टेलीग्राम चैनल इस्लामी अश्आर ⬇️

https://t.me/IslamicUrduPoetry

Share this article
साजिश हो तो ऐसी!
लेख

साजिश हो तो ऐसी!

एक व्यक्ति अपनी पत्नी को लेकर एक धार्मिक विद्वान (आलिम-ए-दीन) के पास आया और कहने लगा: "हज़रत साहब! यह मेरी पत्नी हैं, इन पर अचानक किसी साए (आसिब) का हमला हुआ है, शायद जिन्न चढ़ा है।" जब इमाम साहब ने दम-दुरूद (दुआ) किया तो जिन्न बातें करने लगा। हज़रत साहब: "अभी के अभी बाहर निकलो, वरना मैं... !"...