"अल्लाहुम्मा अहियनी मिस्कीनों व अमितनी मिस्कीनों वहशुरनी फ़ी...
Ummah Post
8 February, 2025

"अल्लाहुम्मा अहियनी मिस्कीनों व अमितनी मिस्कीनों वहशुरनी फ़ी ज़ुमरतिल-मसाकीनी यौमल-क़ियामाह।"

तरजुमा (अनुवाद): ऐ अल्लाह! मुझे मिस्कीन (विनीत/ग़रीब) ज़िंदा रखिए और मिस्कनत ही में मौत दीजिए और आख़िरत (क़यामत के दिन) में भी मिस्कीनों (मसाकीन) की जमात के साथ मेरा हश्र (पुनरुत्थान) हो।

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चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम
लेख

चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम

...मदरसा के छात्रों के लिए एक चौधरी साल भर का गेहूं मदरसा के लिए वक्फ (दान) करता था। किसी शरारती (द्वेषी) शख्स ने मौलाना साहब के बारे में दुश्मनी और नफरत का इजहार ऐसा किया कि पता मालूम करते-करते चौधरी के घर पहुंच गया और कहने लगा: "चौधरी साहब! मदरसे जाकर पता तो करें कि छात्रों के नाम पर क्या खियान...