*حیرت انگیز تصویر !* (हैरतअंगेज़ तस्वीर!)
*पहली नज़र में, ऐसा लगता है कि.... कोई पानी में बैठा पढ़ रहा है, लेकिन जब आप ज़ूम इन करते हैं, तो आपको एहसास होता है कि.... यहाँ कोई शख़्स है न कोई किताब न कोई मुताला (अध्ययन) —सिर्फ़ एक वहम (भ्रम) है.....*
*ज़िंदगी भी इसी तरह है; यह बज़ाहिर (स्पष्ट रूप से) कुछ नज़र आती है, लेकिन ज़ेर-ए-सतह (सतह के नीचे) यह बिल्कुल मुख़्तलिफ़ (अलग) होती है.....*