*"इक़रा बिस्मी रब्बिका"* (पढ़ अपने रब के नाम से) का इख़्तिताम...
Ummah Post
22 March, 2025

*"इक़रा बिस्मी रब्बिका"* (पढ़ अपने रब के नाम से) का इख़्तिताम (अंत) *"वस्जुद वक़्तरिब"* (और सज्दा कर और क़रीब हो जा) पर होता है। जिस पढ़ाई का नतीजा क़ुर्ब-ए-इलाही (अल्लाह की नज़दीकी) न हो, वो इस्लाम का मन्शा (उद्देश्य) नहीं है...

*📝 तअम्मुलात-ए-क़ुरआनिया (क़ुरआनी चिंतन)*

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एक ही सफ़ (कतार) में खड़े हो गए महमूद व अयाज़ (इस्लामी न्याय की मिसाल)
लेख

एक ही सफ़ (कतार) में खड़े हो गए महमूद व अयाज़ (इस्लामी न्याय की मिसाल)

इमाम अबू यूसुफ (रह.) खलीफा हारून रशीद के ज़माने में पूरे इस्लामी जगत के मुख्य न्यायाधीश (काज़ी-उल-कुज़ात) थे। एक बार उनके पास खलीफा हारून रशीद और एक ईसाई नागरिक का मुकदमा आया। इमाम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला ईसाई के हक में सुनाया। इस तरह के सुनहरे और रोशन वाकयात इस्लामी इतिहास के प...