*"इक़रा बिस्मी रब्बिका"* (पढ़ अपने रब के नाम से) का इख़्तिताम...
Ummah Post
22 March, 2025

*"इक़रा बिस्मी रब्बिका"* (पढ़ अपने रब के नाम से) का इख़्तिताम (अंत) *"वस्जुद वक़्तरिब"* (और सज्दा कर और क़रीब हो जा) पर होता है। जिस पढ़ाई का नतीजा क़ुर्ब-ए-इलाही (अल्लाह की नज़दीकी) न हो, वो इस्लाम का मन्शा (उद्देश्य) नहीं है...

*📝 तअम्मुलात-ए-क़ुरआनिया (क़ुरआनी चिंतन)*

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घी चोर नौकर
लेख

घी चोर नौकर

एक व्यक्ति एक किराने की दुकान पर नौकरी करता था। वह किसी न किसी बहाने दुकान से कुछ न कुछ चोरी करता रहता था। दुकान का मालिक बहुत ही खुशमिज़ाज (अच्छे अख़्लाक़ वाला) और ईमानदार इंसान था। वक़्त गुज़रता गया और दस-बारह साल बीत गए। अल्लाह ने मालिक को खूब बरकत दी और उसकी दुकान शहर की सबसे बड़ी दुकान बन गई...