क़ुरआन में दो सूरतें 'वैल' (तबाही/अफ़सोस) से शुरू हुई हैं।...
Ummah Post
22 March, 2025

क़ुरआन में दो सूरतें 'वैल' (तबाही/अफ़सोस) से शुरू हुई हैं।

{ वैलुल-लिल मुतफ़्फ़िफ़ीन }।

{ वैलुल-लिकुल्लि हुमज़तिल-लुमज़ह }।

पहली लोगों के अमवाल (माल/संपत्ति) से मुतअल्लिक़ (संबंधित) है,

दूसरी लोगों की इज़्ज़तों/किरदार से मुतअल्लिक़ है।

लिहाज़ा दोनों के क़रीब मत जाइए।

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आज़माइशों के पीछे छिपी ईश्वरीय हिकमत: मौलाना रूमी का एक ख़ूबसूरत सबक़
लेख

आज़माइशों के पीछे छिपी ईश्वरीय हिकमत: मौलाना रूमी का एक ख़ूबसूरत सबक़

एक दिन मौलाना रूमी (रहमतुल्लाह अलैह) अपने घर तशरीफ़ ले गए और देखा कि उनका बेटा उदास बैठा है। उन्होंने दरयाफ़्त किया (पूछा) कि "बेटा, उदास क्यों हो?" तो बेटे ने जवाब दिया, "कुछ नहीं।" इस पर मौलाना रूमी (रहमतुल्लाह अलैह) बाहर गए और एक भेड़िये की खाल ओढ़कर आए और डराने के लिए गुर्राने लगे। इस पर उनका...