"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़...
Ummah Post
25 March, 2025

"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़लती मत करना। यही लम्हात (पल) सब्र के होते हैं—वह लम्हे जब दोनों जहान का मालिक हमारे साथ हो जाता है। और जब वह साथ हो जाता है, तो इंसान को फ़र्श से अर्श (ज़मीन से आसमान) पर पहुँचा दिया जाता है। यह मौक़ा गंवाने का नहीं, सब कुछ पाने का होता है।" _💯💫

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परहेज़गार उस्ताद और समझदार शागिर्द
लेख

परहेज़गार उस्ताद और समझदार शागिर्द

हज़रत हकीमुल उम्मत थानवी और हज़रत शाह वसीउल्लाह इलाहाबादी (नूरुल्लाह मरक़दहुमा) दोनों ने यह वाक़िया नक़्ल किया कि एक परहेज़गार आलिम बच्चों को पढ़ाते थे। एक दिन उनके घर में फ़क्र व फ़ाक़ा (ग़रीबी और भुखमरी) था, भूख की शिद्दत (तीव्रता) से उनका चेहरा मुरझाया हुआ था। जो तलबा (छात्र) पढ़ने आते थे, उनमें...