"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़लती मत करना। यही लम्हात (पल) सब्र के होते हैं—वह लम्हे जब दोनों जहान का मालिक हमारे साथ हो जाता है। और जब वह साथ हो जाता है, तो इंसान को फ़र्श से अर्श (ज़मीन से आसमान) पर पहुँचा दिया जाता है। यह मौक़ा गंवाने का नहीं, सब कुछ पाने का होता है।" _💯💫
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