*_वक़्फ़ संशोधन बिल की ना-मंजूरी के संबंध में दुआ के विशेष प्रबंध की दरख़्वास्त_*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वक़्फ़ संशोधन बिल कल दोपहर 12:00 बजे संसद में पेश कर दिया जाएगा। आप हज़रात इस वक़्फ़ संशोधन बिल के नुक़सानात और ख़तरों से अच्छी तरह वाक़िफ़ (परिचित) हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित तमाम राष्ट्रीय (मिल्ली) संगठनों ने इस वक़्फ़ संशोधन बिल को रोकने की हर संभव कोशिशें की हैं। अब समय दुआ का है, क्योंकि कोशिशों और मेहनत में रंग भरने वाली चीज़ दुआ ही है और यही मोमिन (आस्तिक) का हथियार है। इसलिए तमाम मुसलमान भाइयों और बहनों से गुज़ारिश करता हूँ कि दुआ का ख़ूब एहतमाम (विशेष प्रबंध) फरमाएं और "हस्बुनल्लाहु व निअमल वकील" और आयत-ए-करीमा "ला इलाहा इल्ला अंता सुब्हानका इन्नी कुंतु मिनज़-ज़ालिमीन" बकसरत (अधिकता से) पढ़कर बारगाह-ए-इलाही में अपनी दरख़्वास्त व इल्तिजा पेश करें। सिर्फ़ तदबीरों (उपायों) पर भरोसा करना मोमिन का तरीक़ा नहीं है, बल्कि तदबीरें इख्तियार करने के बाद अल्लाह तआला की तरफ़ रुजू करना (मुड़ना) और उससे लौ लगाना ही मोमिनों का तरीक़ा और उनका तौर-तरीक़ा होना चाहिए।
मुझे उम्मीद है कि आप हज़रात ज़रूर इस ओर ध्यान देंगे, बा-इज़्नील्लाह (अल्लाह के हुक्म से)।
*वस्सलाम*
*मोहम्मद उमरेन महफ़ूज़ रहमानी*
*सज्जादा नशीन, ख़ानक़ाह रहमानिया मालेगांव, महाराष्ट्र*