इमाम अबू दाऊद (रहमतुल्लाह अलैह) से पूछा गया: "जब फ़ितने बढ़ जा...
Ummah Post
2 April, 2025

इमाम अबू दाऊद (रहमतुल्लाह अलैह) से पूछा गया: "जब फ़ितने बढ़ जाएं और अहल-ए-बिदअत (नवाचार करने वाले) की कसरत हो जाए, तो आप अपने बाद किसके पास बैठने का हुक्म देंगे?"

फ़रमाया: "किताबें।" 🖤

(अल-फ़वाइद अल-मुंतख़बा लि इब्न बशकुवाल 1/413)

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इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़
लेख

इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़

असली नाम अम्र बिन महबूब था, 160 हिजरी में पैदा हुए और 'जाहिज़' के लक़ब (उपाधि) से मशहूर हुए। अरबी में जाहिज़ उसे कहते हैं जिसकी आँखों के ढेले (पुतलियाँ) बाहर की ओर उभरे हुए हों। शुरुआत में वे इस लक़ब को नापसंद करते थे, लेकिन रफ़्ता-रफ़्ता (धीरे-धीरे) ख़ामोश हो गए। शायद ही किसी के रूप-रंग का इस तर...