मल्फ़ूज़: आफ़ियत (कुशल-मंगल) को ग़नीमत (सौभाग्य) समझो
*मल्फ...
Ummah Post
3 April, 2025

मल्फ़ूज़: आफ़ियत (कुशल-मंगल) को ग़नीमत (सौभाग्य) समझो

*मल्फ़ूज़ात-ए-हकीम-उल-उम्मत मुजद्दिद-उल-मिलत हज़रत मौलाना मुहम्मद अशरफ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह*

*आफ़ियत को ग़नीमत समझो*

इरशाद फ़रमाया कि आफ़ियत (कुशलता) और अमन (शांति) को ग़नीमत समझो और आफ़ियत और अमन ही को मांगो, हाँ अगर कोई मुसीबत खुद-ब-खुद ही पेश आए तो उसमें सब्र व इस्तक़लाल (धैर्य और दृढ़ता) से काम लो, यही सुन्नत है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आदत-ए-शरीफ़ा यही थी कि खुद किसी हादसे की तमन्ना न फ़रमाते थे, अलबत्ता हर्ब (जंग) का मौक़ा होता था तो जो उसके मुनासिब तदबीरें (उपाय) हैं वह इख़्तियार करते थे।

(313 अशरफ़ी जवाहरात, सफ़्हा 55)

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मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
लेख

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...