"खुशखबरी है उस व्यक्ति के लिए, जिसने अपनी क़ब्र में दाखिल होने से पहले ही उसकी रोशनी का इंतज़ाम कर लिया; जिसने अपने परवरदिगार (ईश्वर) से मुलाक़ात से पहले ही उसे राज़ी कर लिया; और जिसने नमाज़ पढ़ी, इससे पहले कि उस पर नमाज़ (जनाज़े की नमाज़) पढ़ी जाए!"
— इमाम इब्न अल-जौज़ी (रहमतुल्लाही अलैहि)