*┄┅═❁ उर्दू अदब (साहित्य) ❁═┅┄*

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*🪴 कभी बेट...
Ummah Post
24 April, 2025

*┄┅═❁ उर्दू अदब (साहित्य) ❁═┅┄*

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*🪴 कभी बेटी کو ज़िम्मेदारी नहीं,*

*रब की तरफ़ से "अमानत" समझो...!*

*🍃 कभी बहन को बोझ नहीं,*

*"दुआओं की ढाल" समझो...!*

*☘️ कभी माँ को बुढ़ापे में बोझ नहीं,*

*"जन्नत की चाबी" समझो...!*

*🌿 कभी बीवी को पाबंदी नहीं,*

*"सुकून-ए-दिल" (दिल का सुकुन) समझो...!*

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*┅┈•※ ͜✤☆उर्दू अदब☆✤͜※┅┄*

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हासिद (ईर्ष्यालु) की सज़ा, आपका सब्र है
लेख

हासिद (ईर्ष्यालु) की सज़ा, आपका सब्र है

इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाही अलैहि) के वालिद साहब का इंतक़ाल हो गया। तीन दिन ताज़ियत (शोक) के लिए बैठे रहे, तीन दिन के बाद बाहर निकल कर चौक में आ गए। एक शख़्स आपका हासिद (ईर्ष्या करने वाला) था और सख़्त विरोधी था, सारा इलाक़ा जानता था कि वह आपका मुख़ालिफ़ (विरोधी) है। जब आप बाहर निकले तो चौक में बहुत...