"शाम होते ही सूरज से हुकूमत छीन लेता है,
सुबह उठते ही तारों...
Ummah Post
29 April, 2025

"शाम होते ही सूरज से हुकूमत छीन लेता है,

सुबह उठते ही तारों से क़यादत (नेतृत्व) छीन लेता है।

और अकड़ के न चल ऐ इंसान,

तकब्बुर (घमंड) करने वालों से अल्लाह इज़्ज़त छीन लेता है।"

Share this article
खामोश परिंदा
लेख

खामोश परिंदा

हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के दौर में एक शख़्स ने एक ख़ूबसूरत परिंदा ख़रीदा। वह जब चहचहाता तो उसकी अत्यंत दिलकश और सुरीली आवाज़ से वह शख़्स बहुत ख़ुश होता, मानो उस परिंदे की आवाज़ बहुत ही मीठी और प्यारी थी। एक दिन अचानक उस पिंजरे के पास उसी की तरह का एक और परिंदा आया और अपनी ज़बान में कुछ बातें...