बच्चा गालियाँ कहाँ से सीखता है?
बच्चा ये گالیاں (गालियाँ) कहाँ से सीखता है? सबसे पहले घर से सीखता है। जो बाप बात-बात पर अपनी बीवी को गाली दे रहा हो, अपने बच्चों को गालियाँ दे रहा हो, दोस्तों के साथ निजी महफ़िल और...
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बच्चा ये گالیاں (गालियाँ) कहाँ से सीखता है? सबसे पहले घर से सीखता है। जो बाप बात-बात पर अपनी बीवी को गाली दे रहा हो, अपने बच्चों को गालियाँ दे रहा हो, दोस्तों के साथ निजी महफ़िल और...
एक बार हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी (रह.) पर ग़द्दारी (राजद्रोह) का मुक़दमा चला और फ़िरंगी (अंग्रेज़) की अदालत हॉल कराची में उनकी पेशी हुई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर और बहुत सारे दूस...
नबी करीम ﷺ की तर्बियत का एक तरीक़ा यह था कि पहले ग़लती का एहसास दिलाते थे, फिर नसीहत फ़रमाते थे। एक मर्तबा आप सहाबा इकराम की मजलिस में तशरीफ़ फ़रमा थे, एक नौजवान मस्जिद में दाख़िल...
शेख़ुल क़ुरआन मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़रवली ख़ान साहब (रह.) फ़रमाते थे: मदारिस (मदरसों) के तलबा (छात्र) बहुत पाक मख़्लूक़ (पवित्र जीव) हैं। एक दिन हमारे मदरसे में एक तालिब-ए-इल्म...
हज़रत वाला (रह.) की तरफ़ से अपने सारे मुरीदीन (शिष्यों) और मुतअल्लिक़ीन (परिचितों) को यह हिदायत थी कि जब कभी रेलवे में सफ़र करो, और तुम्हारा सामान उस मिक़दार (मात्रा) से ज़ायद (अधि...
हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब नानौतवी (रहमतुल्लाही अलैहि) का मुज़फ़्फ़रनगर में एक थानेदार मुअतक़िद (भक्त/प्रशंसक) था। एक दिन उसने हज़रत मौलाना नानौतवी की दावत की। मौलाना ने देखा...
मेरे बुख़ारी शरीफ़ के उस्ताद-ए-मोहतरम, साकिन-ए-बक़ी (बक़ी के निवासी), हज़रत अक़दस मौलाना इस्लाम-उल-हक़ साहब रहमतुल्लाह अलैह ने बुख़ारी शरीफ़ के दर्स (व्याख्यान) में एक क़ीमती बात ब...
अगर किसी ख़ैमे (तंबू) पर लिखा हो 'ख़ैमा-ए-लैला' (लैला का तंबू) लेकिन उसमें झाँक कर देखा तो अंदर कुत्ता बँधा हुआ है, तो उस ख़ैमे की कोई क़द्र नहीं होगी बल्कि लोग मज़ाक उड़ाएंगे।...
हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है: 1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक...
एक बार मैं शेख हज़रत मौलाना मसीहउल्लाह ख़ान साहब रहमतुल्लाह अलैह के पास बैठा हुआ था और उस समय वहां और कोई नहीं था, केवल मैं था। इसी बीच एक आदमी आया और हज़रत से तावीज़ मांगने लगा। ह...
हज़रत मौलाना मोहम्मद अशरफ़ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह जब कोई दुआ मांगते और आंख से कोई आंसू आता, तो हज़रत उन आंसुओं को अपने चेहरे पर मल लिया करते थे। एक बार एक छात्र (طالب علم) ने दे...
चुनांचे मैं आपको एक अजीब और इब्रतनाक (सबक आमोज़) हिकायत (क़िस्सा) सुनाता हूँ जो मैंने मौलाना फ़तह मोहम्मद साहब रहमतुल्लाह अलैह से सुनी थी। मौलाना फ़रमाते हैं कि शेख़ दहान (तेल के व...