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हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और एक देहाती के बीच एक सबक़आमोज़ बातचीत

हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और एक देहाती के बीच एक सबक़आमोज़ बातचीत

एक देहाती (गांववासी) हज़रत हुसैन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पास गया, उनको सलाम किया और उनसे अपनी ज़रूरत (हाजत) पूरी करने का सवाल किया। उसने कहा, "मैंने आपके नाना (सल्लल्लाहु अल...

19 Nov, 2024 और पढ़ें
सच्चा राज़िक़ (अन्नदाता) कौन?

सच्चा राज़िक़ (अन्नदाता) कौन?

✍🏻मुलाज़िम बहुत ही आज्ञाकारी था। मालिक ने खुश होकर उसकी पांच हजार तनख्वाह बढ़ा दी। उसकी आज्ञाकारिता में कोई फ़र्क नहीं आया, लेकिन वह बहुत ज़्यादा शुक्रगुज़ार भी नहीं हुआ। मा...

16 Nov, 2024 और पढ़ें
अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या

अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या

सामान से लदा हुआ एक बहरी जहाज़ (समुद्री जहाज़) महवे-सफ़र था कि तेज़ हवाओं की वजह से वह उलटने लगा। क़रीब था कि जहाज़ डूब जाता, उसमें मौजूद ताज़िरों (व्यापारियों) ने कहा कि बोझ हल्का...

15 Nov, 2024 और पढ़ें
बाबा जी की चार नसीहतें - दिलचस्प वाकया

बाबा जी की चार नसीहतें - दिलचस्प वाकया

उन दिनों जब मैं मदरसे में पढ़ता था। एक बाबा जी ज़्यादातर समय मस्जिद में गुज़ारते थे। हर समय किसी न किसी इबादत में व्यस्त रहते थे। यही मौसम था, सख्त सर्दी थी। मैंने देखा कि वह बर्फ...

12 Nov, 2024 और पढ़ें
हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल...

12 Nov, 2024 और पढ़ें
ये हालात बदलते क्यों नहीं?

ये हालात बदलते क्यों नहीं?

मुही-उस-सुन्नत हज़रत शाह अबरार-उल-हक़ से कुछ लोगों ने शिकायत की कि मुसलमानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं, खानक़ाहों और मदरसों में दुआओं का खूब प्रबंध हो रहा है, अल्...

07 Nov, 2024 और पढ़ें
सुल्तान महमूद और चोरों की हिकायत

सुल्तान महमूद और चोरों की हिकायत

मौलाना रूमी ने सुल्तान महमूद गज़नवी का एक अजीब वाक़या लिखा है जो बड़ा इब्रत-खेज़ (عبرت خیز - शिक्षाप्रद) और सबक़-आमोज़ है। वह यह कि सुल्तान महमूद गज़नवी के ज़माने में चोरों का कुछ...

31 Oct, 2024 और पढ़ें
शेख अबू हाज़िम की हक़-गोई और सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का रो पड़ना

शेख अबू हाज़िम की हक़-गोई और सुलेमान बिन अब्दुल मलिक का रो पड़ना

सुलेमान बिन अब्दुल मलिक, जो बनू उमय्या का बादशाह था, ने एक मर्तबा शैख़-उल-हदीस अबू हाज़िम (रहमतुल्लाह अलैह) से दरयाफ़्त (पूछा) किया कि इसकी क्या वजह है कि हम लोग दुनिया को पसंद और आ...

27 Oct, 2024 और पढ़ें
एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़मान...

24 Oct, 2024 और पढ़ें
फेक लाइफ (बनावटी जिंदगी) का फितना

फेक लाइफ (बनावटी जिंदगी) का फितना

इंसान के अख़लाक़ी वजूद (नैतिक अस्तित्व) को जो खतरनाक बीमारियां लाहक (ग्रसित) हैं, उनमें झूठ और मबालगे (अतिशयोक्ति) पर मबनी (आधारित) जिंदगी गुजारने का फितना (बुराई) आज-कल के दौर में...

22 Oct, 2024 और पढ़ें
फ़ितना-ए-क़ादियानियत का पस-मंज़र (संक्षेप में)

फ़ितना-ए-क़ादियानियत का पस-मंज़र (संक्षेप में)

उपमहाद्वीप (पाक-ओ-हिंद) में जब अंग्रेज़ अपने ज़ुल्म-ओ-सितम और ज़्यादतियों के बावजूद मुसलमानों को मग़लूब (परास्त) न कर सका, तो उसने एक कमीशन के ज़रिए इसकी वजह मालूम करने के लिए पूरे...

22 Oct, 2024 और पढ़ें
मैं अपनी स्मृति में तुम्हारे बारे में सब कुछ भुला दूंगा।

मैं अपनी स्मृति में तुम्हारे बारे में सब कुछ भुला दूंगा।

हज़रत यह्या बिन मुआज़ रहमतुल्लाही अलैहि, जिनको हक़ायक़ व दक़ायक़ (आध्यात्मिक सच्चाइयों और बारीकियों) पर मुकम्मल दस्तरस (पूर्ण नियंत्रण) हासिल थी, और जिनके मुतअल्लिक़ (बारे में) कुछ...

18 Oct, 2024 और पढ़ें