बा-जमात नमाज़ की अहमियत और मुफ़्ती मुहम्मद शफ़ी साहब की आज्ञाकारिता
मुझे याद है कि देवबंद में जब मेरी उम्र तक़रीबन दस-बारह साल थी, एक दिन फज्र की नमाज़ के वक़्त सख़्त आंधी, मूसलाधार बारिश और गरज-चमक की बिना पर (वजह से) वालिद साहब (मुफ़्ती मुहम्मद श...