सी स्क्वर्ट: दिमाग खाने वाला समुद्री जीव
06 जून, 2025 - "जाओ, मेरा दिमाग मत खाओ"। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने यह वाक्य न सुना हो। हमारी भाषा में "दिमाग खाना" केवल एक मुहावरे के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन समु...
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06 जून, 2025 - "जाओ, मेरा दिमाग मत खाओ"। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने यह वाक्य न सुना हो। हमारी भाषा में "दिमाग खाना" केवल एक मुहावरे के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन समु...
जब हज़रत यूसुफ़ को कुएँ में डाला गया तो हज़रत मूसा को भी पानी में डाला गया। हज़रत यूसुफ़ मिस्र में थे तो हज़रत मूसा भी मिस्र में थे। हज़रत यूसुफ़ ने महल में ज़िंदगी गुज़ारी त...
(मुलाख़्ख़स - इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप) अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक मुक़र्रर रास्ता बनाया है। खाना मुँह से मेदे तक जाता है, जहाँ लुआब इसे हज़्म के क़ाबिल बनाता है। साँस नाक से फ...
🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते...
आज मैंने अपने पिता के साथ बैंक में एक घंटा बिताया था, क्योंकि उन्हें कुछ पैसे ट्रांसफर करने थे। मैं खुद को रोक नहीं सका और पूछा। "बाबा, हम आपकी इंटरनेट बैंकिंग चालू क्यों नहीं...
एक पर्यटक मैक्सिको पहुँचा, जहाँ उसने स्थानीय मछुआरों की उत्तम मछलियों की प्रशंसा की और पूछा: “इन्हें पकड़ने में कितना समय लगता है?” मछुआरों ने जवाब दिया: “ज़्यादा नहीं!” पर्...
रोनाल्ड ओबुस नाम के व्यक्ति ने खुदकुशी करनी चाही तो सबसे आसान तरीका इस्तेमाल किया और वह यह कि उस इमारत से छलांग लगा दे जिसमें वह रहता था। उसने इमारत की दसवीं मंजिल से छलांग लगा दी...
दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।...
बहुत समय पहले एक जगह सेब का एक बहुत बड़ा पेड़ था और रोजाना एक बच्चा वहाँ आकर उस पेड़ के इर्द-गिर्द खेला करता था। वह बच्चा उस पेड़ की टहनियों से चिपक-चिपक कर उसकी चोटी पर चढ़ता, उसक...
एक मर्तबा एक बादशाह ने अपने वज़ीर को आधी सल्तनत देने को कहा, लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी आयद (लागू) कीं। वज़ीर ने लालच में आकर शर्तें जानने की दरख़्वास्त की। बादशाह ने शर्तें ३...
माह-ए-रमज़ानुल मुबारक मुसलमानों के लिए महज़ एक इबादती महीना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा महीना है जो न सिर्फ़ व्यक्ति की रूहानी (आध्यात्मिक) तरबियत (प्रशिक्षण) करता है, बल्कि सामाजिक ज...
यज़ीद बिन मलिक एक उमय्यद खलीफा थे, वह नए खलीफा थे जो उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ के बाद आए थे। एक दिन वह कहने लगे, "कौन कहता है कि बादशाहों को खुशियाँ नसीब नहीं होतीं...? मैं आज का दिन ख...