अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या
सामान से लदा हुआ एक बहरी जहाज़ (समुद्री जहाज़) महवे-सफ़र था कि तेज़ हवाओं की वजह से वह उलटने लगा। क़रीब था कि जहाज़ डूब जाता, उसमें मौजूद ताज़िरों (व्यापारियों) ने कहा कि बोझ हल्का...
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सामान से लदा हुआ एक बहरी जहाज़ (समुद्री जहाज़) महवे-सफ़र था कि तेज़ हवाओं की वजह से वह उलटने लगा। क़रीब था कि जहाज़ डूब जाता, उसमें मौजूद ताज़िरों (व्यापारियों) ने कहा कि बोझ हल्का...
एक बार एक गधे ने एक लोमड़ी से कहा: "घास नीली है।" लोमड़ी ने जवाब दिया: "नहीं, घास हरी है।" बहस गर्म हुई, और दोनों ने इसे मध्यस्थता के लिए पेश करने का फ़ैसला किया, और इसके लिए व...
यूनानी कहते हैं कि औरत सांप से ज़्यादा ख़तरनाक है। सुक़रात का कहना था कि औरत से ज़्यादा और कोई चीज़ दुनिया में फ़ित्ना व फ़साद (अराजकता और अशांति) की नहीं। बोना विट्टियर का क़ौल...
हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है: 1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक...
एक बार मैं शेख हज़रत मौलाना मसीहउल्लाह ख़ान साहब रहमतुल्लाह अलैह के पास बैठा हुआ था और उस समय वहां और कोई नहीं था, केवल मैं था। इसी बीच एक आदमी आया और हज़रत से तावीज़ मांगने लगा। ह...
हज़रत मौलाना मोहम्मद अशरफ़ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह जब कोई दुआ मांगते और आंख से कोई आंसू आता, तो हज़रत उन आंसुओं को अपने चेहरे पर मल लिया करते थे। एक बार एक छात्र (طالب علم) ने दे...
चुनांचे मैं आपको एक अजीब और इब्रतनाक (सबक आमोज़) हिकायत (क़िस्सा) सुनाता हूँ जो मैंने मौलाना फ़तह मोहम्मद साहब रहमतुल्लाह अलैह से सुनी थी। मौलाना फ़रमाते हैं कि शेख़ दहान (तेल के व...
बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!) नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज...
उन दिनों जब मैं मदरसे में पढ़ता था। एक बाबा जी ज़्यादातर समय मस्जिद में गुज़ारते थे। हर समय किसी न किसी इबादत में व्यस्त रहते थे। यही मौसम था, सख्त सर्दी थी। मैंने देखा कि वह बर्फ...
(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल...
मौलाना फखरुल हसन साहब गंगोही रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि मैं मक्का मुअज्जमा में एक बुजुर्ग की खिदमत में हाजिर हुआ, लोग उनके मुंह पर उनकी तारीफ कर रहे थे और वह खुश हो रहे थे। मैंन...
इमाम अबू यूसुफ रहमतुल्लाह अलैह हारून रशीद के ज़माने में पूरे आलम-ए-इस्लाम के क़ाज़ी-उल-क़ुज़ात (मुख्य न्यायाधीश) थे, एक बार उनके पास ख़लीफ़ा हारून रशीद और एक नसरानी (ईसाई) का मुक़द...