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अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।...

06 Jun, 2025 और पढ़ें
हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) का एक वाक़या और पिता के मित्रों का सम्मान

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) का एक वाक़या और पिता के मित्रों का सम्मान

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) एक बार सफ़र पर जा रहे थे, ग़ालिबन (शायद) हज या उमरे का सफ़र था। साहिबे-हैसियत (धनी) अरबों की आदत के मुताबिक़, आप सफ़र पर जाते हुए सवा...

07 Nov, 2024 और पढ़ें