मेरे आदरणीय पिता का घरेलू और पारिवारिक जीवन
लेखक: मौलाना मोहम्मद सईद पालनपुरी शिक्षक: जामिया अल-इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी, देवबंद मेरे आदरणीय पिता हज़रत मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी, पूर्व शेख-उल-हदीस और स...
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लेखक: मौलाना मोहम्मद सईद पालनपुरी शिक्षक: जामिया अल-इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी, देवबंद मेरे आदरणीय पिता हज़रत मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी, पूर्व शेख-उल-हदीस और स...
बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम...
हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھا...
1956 में अमेरिका में एक समुद्री जहाज़ तेल लेकर जा रहा था। यह जहाज़ अचानक अपने रूट से हटा, समुद्र में मौजूद एक चट्टान से टकराया और पाश-पाश (चकनाचूर) हो गया। हादसे के बाद जहाज़ के कप...
06 जून, 2025 - "जाओ, मेरा दिमाग मत खाओ"। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने यह वाक्य न सुना हो। हमारी भाषा में "दिमाग खाना" केवल एक मुहावरे के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन समु...
जब हज़रत यूसुफ़ को कुएँ में डाला गया तो हज़रत मूसा को भी पानी में डाला गया। हज़रत यूसुफ़ मिस्र में थे तो हज़रत मूसा भी मिस्र में थे। हज़रत यूसुफ़ ने महल में ज़िंदगी गुज़ारी त...
दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।...
परसों एक किताब पढ़ रहा था۔۔ इस दौरान एक छोटी सी मक्खी उड़ कर मेरी किताब पर आ बैठी۔۔۔ पहले तो मैंने उसको भगा देने की कोशिश की۔۔۔۔ लेकिन वह उड़-उड़ कर किताब पर वापस आ बैठती। यह देख क...
एक नौजवान अपनी ज़िंदगी के मामलात से काफ़ी परेशान था। एक रोज़ एक दरवेश से मुलाक़ात हो गई तो अपना हाल कह सुनाया। कहने लगा कि बहुत परेशान हूँ। यह दुख और परेशानियाँ अब मेरी बर्दाश्त से...
हज़रत मौलाना मोहम्मद अशरफ़ अली थानवी रहमतुल्लाह अलैह जब कोई दुआ मांगते और आंख से कोई आंसू आता, तो हज़रत उन आंसुओं को अपने चेहरे पर मल लिया करते थे। एक बार एक छात्र (طالب علم) ने दे...
उन दिनों जब मैं मदरसे में पढ़ता था। एक बाबा जी ज़्यादातर समय मस्जिद में गुज़ारते थे। हर समय किसी न किसी इबादत में व्यस्त रहते थे। यही मौसम था, सख्त सर्दी थी। मैंने देखा कि वह बर्फ...
...मदरसा के छात्रों के लिए एक चौधरी साल भर का गेहूं मदरसा के लिए वक्फ (दान) करता था। किसी शरारती (द्वेषी) शख्स ने मौलाना साहब के बारे में दुश्मनी और नफरत का इजहार ऐसा किया कि पता म...