इंसान की गुज़रती ज़िंदगी...! (एक रुला देने वाली कहानी)
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इंसान की गुज़रती ज़िंदगी...! (एक रुला देने वाली कहानी)

admin
26 Mar, 2025

बहुत समय पहले एक जगह सेब का एक बहुत बड़ा पेड़ था और रोजाना एक बच्चा वहाँ आकर उस पेड़ के इर्द-गिर्द खेला करता था। वह बच्चा उस पेड़ की टहनियों से चिपक-चिपक कर उसकी चोटी पर चढ़ता, उसके सेब खाता और थककर उसकी छाया के नीचे लेटकर मजे से सोता (ऊँघता) था। वह बच्चा उस पेड़ से प्यार करता था और वह पेड़ भी उससे प्यार करता था और उसके साथ खेलना पसंद करता था। समय बीता और बच्चा बड़ा हो गया।

और फिर बच्चा हर रोज़ पेड़ के इर्द-गिर्द नहीं खेलता था। एक दिन बच्चा वापस आया लेकिन वह दुखी था।

पेड़ ने कहा, "आओ मेरे साथ खेलो।"

बच्चे ने जवाब दिया, "मैं अब इतना छोटा नहीं रहा कि पेड़ों के इर्द-गिर्द खेलूँ, मुझे खिलौने चाहिए और खिलौने खरीदने के लिए मुझे पैसे चाहिए।"

पेड़ ने कहा, "मेरे पास तो पैसे नहीं हैं।"

"लेकिन यह हो सकता है कि तुम मेरे सारे के सारे सेब ले लो और उन्हें बेच दो ताकि तुम्हें पैसे मिल जाएँ।"

बच्चा बहुत खुश हो गया; वह पेड़ पर चढ़ा और सारे सेब तोड़ लिए और ख़ुशी-ख़ुशी वहाँ से चला गया। पेड़ ने अपने सारे फल खो दिए, लेकिन उसका यह दुःख उस ख़ुशी के सामने बहुत कम था जो उसे बच्चे की ख़ुशी देखकर हुई थी। लेकिन पेड़ की ख़ुशी ज़्यादा देर तक न रह सकी क्योंकि सेब ले जाने के बाद बच्चा वापस नहीं आया, इसलिए पेड़ दुखी हो गया।

फिर एक दिन अचानक वह बच्चा वापस आया लेकिन अब वह एक आदमी बन चुका था। पेड़ उसके आने पर बहुत ज़्यादा खुश हुआ और उससे कहा:

"आओ मेरे साथ खेलो।"

बच्चे ने जवाब दिया, "मेरे पास खेलने के लिए समय नहीं है क्योंकि मुझे अपने बीवी-बच्चों के लिए काम करना है, मुझे एक घर चाहिए जो हमें सुरक्षा दे सके, क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?"

"मुझे अफ़सोस है, मेरे पास कोई घर नहीं है लेकिन तुम अपना घर बनाने के लिए मेरी टहनियाँ और शाखाएँ काट सकते हो।"

उस आदमी ने पेड़ की सारी टहनियाँ और शाखाएँ ले लीं और फिर ख़ुशी-ख़ुशी चला गया। जिस तरह वह पहले उसके फल लेकर चला गया था, पेड़ उसको खुश देखकर फिर से बहुत खुश हुआ और वह एक बार फिर ग़ायब हो गया। वह पेड़ के पास वापस नहीं आया और पेड़ एक बार फिर अकेला और दुखी हो गया।

फिर एक लंबे समय के बाद, गर्मियों के एक गर्म दिन में वह आदमी वापस आया और पेड़ एक बार फिर ख़ुशी की इंतिहा (चरम) को छूने लगा कि अब शायद यह मेरे साथ खेलेगा।

पेड़ ने कहा, "आओ मेरे साथ खेलो..."

आदमी ने पेड़ से कहा, "मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ और चाहता हूँ कि किसी नदी में नाव चलाते हुए किसी शांत जगह पर जा पहुँचूँ। क्या तुम मुझे एक नाव दे सकते हो?"

पेड़ ने कहा, "तुम मेरा तना लेकर उसकी नाव बना लो, इस तरह तुम इसके ज़रिए दूर तक जा सकते हो और खुश हो सकते हो।"

तो उस आदमी ने पेड़ का तना काट लिया और उसकी नाव बना ली और फिर आदमी नाव में सवार होकर चला गया और एक लंबी मुद्दत (समय) तक वापस नहीं आया।

आख़िरकार लंबे समय तक ग़ायब रहने के बाद वह आदमी वापस आया, उसे देखकर पेड़ ने दुःख से कहा:

"मुझे अफ़सोस है मेरे बेटे कि अब मेरे पास तुम्हें देने के लिए और कुछ नहीं है और तुम्हारे लिए अब और सेब भी नहीं हैं।"

आदमी ने कहा, "कोई बात नहीं, अब मेरे दाँत भी नहीं हैं जिनसे मैं सेब काट सकूँ।"

"तुम्हारे कूदने-फांदने के लिए अब मेरा तना भी नहीं है।"

तो आदमी ने कहा, "मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ, ऐसा काम नहीं कर सकता।"

पेड़ ने कहा:

"मेरे बेटे, अब मेरे पास वाक़ई कुछ भी नहीं है जो मैं तुम्हें दे सकूँ, अब सिर्फ़ मेरी मरती हुई जड़ें ही बची हैं," पेड़ ने रोते हुए आँसुओं से भरी आवाज़ में कहा।

आदमी ने कहा, "अब मुझे सिर्फ़ कोई ऐसी जगह चाहिए जहाँ मैं सुकून से आराम कर सकूँ।"

"बहुत अच्छी बात है, बूढ़े पेड़ की बूढ़ी जड़ें तुम्हारे आराम करने के लिए बहुत अच्छी जगह हैं।"

पेड़ ने कहा, "आओ मेरे साथ बैठो ताकि तुम सुकून पाओ, आ जाओ।"

आदमी पेड़ के पास आ बैठा, पेड़ फिर से खुश हो गया, मुस्कुराया और उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं।

क्या आप जानते हैं यह पेड़ कौन है??

यह पेड़ आपके माता-पिता हैं...

अपने माता-पिता के त्याग और बलिदान की क़द्र कीजिए, आप उनका हक़ तो कभी भी अदा नहीं कर सकते, मगर उनकी ख़ूब सेवा (ख़िदमत) और आज्ञापालन कीजिए ताकि आपकी दुनिया और आख़िरत संवर जाए, इन्शाअल्लाह।

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मनक़ूल (उद्धृत)।

चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो

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