श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बेमिना इलाके में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। यहां के डूरबल क्षेत्र में स्थित एक अस्थाई बस्ती में अचानक भड़की भीषण आग ने देखते ही देखते करीब 80 झुग्गियों को जलाकर राख कर दिया। इस दर्दनाक अग्निकांड में 16 साल के एक नाबालिग किशोर समेत दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मृतक मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे और यहां कबाड़ बीनने का काम करते थे।
आधी रात को भड़कीं लपटें, कुछ ही पलों में मचा हाहाकार
दमकल एवं आपातकालीन सेवा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने की सूचना देर रात करीब 12:23 बजे मिली। चूंकि ये अस्थाई झुग्गियां मुख्य रूप से सूखी लकड़ी, प्लास्टिक और तिरपाल से बनी हुई थीं, इसलिए आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया। जब तक लोग नींद से जागकर संभल पाते और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचतीं, तब तक आग की ऊंची लपटों ने पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया था।
मलबे से बरामद हुए दो शव, दिल्ली के रहने वाले थे मृतक
घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद जब आग को बुझाकर मलबे में तलाशी अभियान चलाया गया, तो वहां से दो बुरी तरह झुलसे हुए शव (कंकाल) बरामद हुए। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
मोहम्मद नूर आलम (27 वर्ष): मूल निवासी दिल्ली, जो वर्तमान में बेमिना के इसी इलाके में रह रहा था।
अल अमीन (16 वर्ष): मूल निवासी दिल्ली, जो हाल फिलहाल में कुपवाड़ा में रह रहा था।
फॉरेंसिक टीम द्वारा जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद, दोनों शवों को पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के लिए स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।
राहत-बचाव अभियान और अन्य नुकसान
हादसे की गंभीरता को देखते हुए जेवीसी (JVC) और रावलपोरा फायर स्टेशनों से तुरंत दमकल की गाड़ियां रवाना की गईं। आग को बेकाबू होते देख बटामालू स्थित मुख्यालय से अतिरिक्त फायर टेंडर और बचाव दल बुलाए गए। बेमिना थाना पुलिस, स्थानीय प्रशासन और आसपास के निवासियों ने भी राहत-बचाव कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया।
आग की तपिश और लपटें इतनी तेज थीं कि बस्ती के पास स्थित एक खाली पोल्ट्री फार्म और वहां खड़ा एक टिपर वाहन भी इसकी चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। फिलहाल, आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस ने मामला दर्ज कर हर पहलू से विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इस भीषण हादसे के बाद दर्जनों गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।