हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَنَسٍ ، قَالَ : كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَغْدُو يَوْمَ الْفِطْرِ حَتَّى يَأْكُلَ تَمَرَاتٍ(بُخاری : ۹۵۳)
अनुवाद
हज़रत अनस (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि रसूले करीम (ﷺ) ईद-उल-फ़ित्र के दिन न निकलते जब तक कि आप (ﷺ) चंद खजूरें न खा लेते (आप ताक़ अदद खजूरें खाते थे)।
...और मलक-उल-मौत आ पहुँचा!!
लेख

...और मलक-उल-मौत आ पहुँचा!!

एक नौजवान लड़की एक सुपरमार्केट में अपने जिस्म की नुमाइश करते हुए फ़ित्ना अंगेज़ (उत्तेजक) अंदाज़ में जा रही थी। उसके अंदाज़ में ऐसी खुद-नुमाइश (दिखावा) और खुद-सताई (अहंकार) थी जैसे दुनिया उसी की वजह से पैदा की गई हो। વहाँ से एक नेक और सालेह (सज्जन) नौजवान गुज़र रहा था, उसने अज़-राह-ए-हमदर्दी (सहा...

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