हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يُسَلِّمُ الصَّغِيرُ عَلَى الْكَبِيرِ، وَالْمَارُّ عَلَى الْقَاعِدِ، وَالْقَلِيلُ عَلَى الْكَثِيرِ ‏"‏‏(بُخاری شریف ۶۲۳۱)
अनुवाद
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "छोटा बड़े को सलाम करे, और गुज़रने वाला बैठे हुओं को सलाम करे, और थोड़े लोग ज़्यादा को सलाम करें" (थोड़े होने की वजह से वे अदना हैं, इसलिए वे ज़्यादा को सलाम करें) (तोहफ़त-उल-क़ारी)
इमाम ज़ैनुल आबिदीन की गुप्त सेवा – इख़्लास (निःस्वार्थता) की एक बेमिसाल मिसाल
लेख

इमाम ज़ैनुल आबिदीन की गुप्त सेवा – इख़्लास (निःस्वार्थता) की एक बेमिसाल मिसाल

इमाम ज़ैनुल आबिदीन (रहमतुल्लाही अलैहि) को अल्लाह तआला ने बहुत ख़ूबसूरत जिस्म अता किया था। जब उनकी वफ़ात (मृत्यु) हुई और ग़स्साल (शव नहलाने वाला) उन्हें नहलाने लगा, तो उसने देखा कि उनके कंधे के ऊपर एक काला निशान है। उसे समझ नहीं आया कि यह काला निशान क्यों है? अहले-ख़ाना (परिवार वालों) से पूछा गया तो...

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