हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया: तुम्हारे नामों में से अल्लाह के यहाँ पसंदीदा नाम अब्दुल्लाह और अब्दुर रहमान हैं। (तफ़हीम-उल-मुस्लिम/जि: 3/पृ: 409)
एक व्यक्ति आपके पास आया और अर्ज़ किया कि कुछ नसीहत फ़रमाइए। आपने फ़रमाया, "छह (6) बातें बताता हूँ, उन पर अमल करो, फिर कुछ भी करोगे तो नुक़सान न पहुँचेगा।" आपने उन छह बातों की व्याख्या इस तरह की:
1. जब गुनाह करो तो उसकी (अल्लाह पाक की) नेमत मत खाओ। दुनिया में जो कुछ भी है, वह उसी की नेमत है; क्या...