हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ : لَا يُلْدَغُ الْمُؤْمِنُ مِنْ جُحْرٍ وَاحِدٍ مَرَّتَيْنِ (بُخاری شریف: ۶۱۳۳)
अनुवाद
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी अकरम (ﷺ) ने फ़रमाया: मोमिन एक सुराख़ से दो मर्तबा नहीं डसा जा सकता। (नस्र-उल-बारी/जि: 11/पृ: 227)
...और मलक-उल-मौत आ पहुँचा!!
लेख

...और मलक-उल-मौत आ पहुँचा!!

एक नौजवान लड़की एक सुपरमार्केट में अपने जिस्म की नुमाइश करते हुए फ़ित्ना अंगेज़ (उत्तेजक) अंदाज़ में जा रही थी। उसके अंदाज़ में ऐसी खुद-नुमाइश (दिखावा) और खुद-सताई (अहंकार) थी जैसे दुनिया उसी की वजह से पैदा की गई हो। વहाँ से एक नेक और सालेह (सज्जन) नौजवान गुज़र रहा था, उसने अज़-राह-ए-हमदर्दी (सहा...

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