हदीस अल-रसूल ﷺ

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ، أَنّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ، قَالَ : لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ مُسْتَجَابَةٌ يَدْعُو بِهَا ، وَأُرِيدُ أَنْ أَخْتَبِئَ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لِأُمَّتِي فِي الْآخِرَةِ (بُخاری شریف: ۶۳۰۴)
अनुवाद
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "हर नबी के लिए एक (मक़बूल) दुआ है (पस हर नबी ने अपनी वह मक़बूल दुआ दुनिया में मांग ली) और मैं चाहता हूँ कि अपनी (मक़बूल) दुआ को रिज़र्व रखूँ, आख़िरत में मेरी उम्मत की शिफ़ाअत के लिए।" (तुहफ़तुल क़ारी)
एक वली की सच्ची भविष्यवाणी:
लेख

एक वली की सच्ची भविष्यवाणी:

हज़रत शाह अब्दुल रहीम साहब सहारनपुरी, जो बड़े साहिब-ए-कश्फ़-ओ-करामात (आध्यात्मिक रहस्य और चमत्कार वाले) थे, उनका एक वाक़िया बहुत मशहूर है कि पंजाब से हकीम नूरुद्दीन इलाज के सिलसिले में हज़रत शाह साहब के पास आए... हज़रत ने उनसे फ़रमाया कि "हकीम साहब! पंजाब में कोई जगह क़ादियान है, वहाँ से किसी ने नबु...

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