मुहक्कक मसाला

रोज़ेदार का आँखों में दवा डालना।

रोज़े की हालत में आँखों में दवा डालने से रोज़ा फ़ासिद नहीं होता है, अगरचे इस दवा का असर हलक़ के अंदर महसूस हो, क्योंकि आँख, दिमाग़ और मैदे (पेट) के बीच कोई गुज़रगाह (रास्ता) नहीं है कि आँखों के रास्ते से दवा, दिमाग़ या मैदे में पहुँच जाए। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९६)

उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं
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उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं

यह्या बिन यह्या बयान करते हैं: जब इमाम मालिक (रहमतुल्लाह अलैह) की मृत्यु-शय्या की बीमारी लंबी हो गई और अंतिम समय करीब आ गया, तो मदीना मुनव्वरा और अन्य शहरों से सभी उलेमा (विद्वान) और फुकहा (न्यायविद) इमाम साहब के घर पर जमा हो गए ताकि वे समय के इमाम से आखिरी मुलाकात का लाभ उठा सकें और उनकी वसीयतों (उ...

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