रोज़ेदार का आँखों में दवा डालना।
रोज़े की हालत में आँखों में दवा डालने से रोज़ा फ़ासिद नहीं होता है, अगरचे इस दवा का असर हलक़ के अंदर महसूस हो, क्योंकि आँख, दिमाग़ और मैदे (पेट) के बीच कोई गुज़रगाह (रास्ता) नहीं है कि आँखों के रास्ते से दवा, दिमाग़ या मैदे में पहुँच जाए। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:९६)