मुहक्कक मसाला

अंजान मुस्लिम की पकी हुई चीज़ से इफ़्तार करना।

जब मोमिन और मुसलमान भाई हमको इफ़्तार करा रहा है तो हमको 'ज़न्नू बिल-मोमिनीन ख़ैरा' (मोमिनों के बारे में अच्छा गुमान रखो) के तहत यही गुमान करना चाहिए कि हलाल माल से खिला रहा है, नीज़ (तथा) हम ज़ाहिर के मुकल्लफ़ (पाबंद) हैं, बातिन (छिपे हुए) के नहीं, लिहाज़ा हमको किसी मुसलमान के बारे में तहक़ीक़ (जांच) करने का भी हक़ नहीं है; अलबत्ता अगर दलाइल व क़राइन (सबूतों और संकेतों) के ज़रीये हतमी तौर पर (निश्चित रूप से) मालूम हो जाए कि यह हराम माल से खिलाता है तो फिर ऐसे शख़्स के यहाँ खाने-पीने से एहतराज़ (परहेज़) लाज़िम है। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३४५)

पूर्ण स्वतंत्रता का भ्रम: अभिनेत्री हुमैरा असगर की दर्दनाक कहानी
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पूर्ण स्वतंत्रता का भ्रम: अभिनेत्री हुमैरा असगर की दर्दनाक कहानी

"तो हे आँख वालों! इबरत (सीख) हासिल करो।" यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" का नारा लगाते हैं। मर्जी भी उसी की थी और जिस्म भी उसी का था, मगर उसके बाद जो हुआ वह सन्नाटे से गूंजता हुआ एक कमरा था। बंद दरवाजे के पीछे महीनों से खामोश पड़ी एक लाश थी, और आस-पास न कोई रोने वाली आँख...

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