सहरी का मुस्तहब वक़्त।
पूरी रात यानी ग़ुरूब-ए-आफ़ताब (सूर्यास्त) से सुब्ह-ए-सादिक़ (सच्ची भोर) तक के दरमियानी वक़्त को छह बराबर हिस्सों में तक़्सीम करके (बांटकर) आख़िरी हिस्से में सहरी खाना मुस्तहब (पसंदीदा/अनुशंसित) है, मसलन (उदाहरण के लिए) 12 घंटे की अगर रात हो तो आख़िरी दो घंटों में सहरी खाना मुस्तहब होगा। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३३९)