मुहक्कक मसाला

सहरी का मुस्तहब वक़्त।

पूरी रात यानी ग़ुरूब-ए-आफ़ताब (सूर्यास्त) से सुब्ह-ए-सादिक़ (सच्ची भोर) तक के दरमियानी वक़्त को छह बराबर हिस्सों में तक़्सीम करके (बांटकर) आख़िरी हिस्से में सहरी खाना मुस्तहब (पसंदीदा/अनुशंसित) है, मसलन (उदाहरण के लिए) 12 घंटे की अगर रात हो तो आख़िरी दो घंटों में सहरी खाना मुस्तहब होगा। (किताब-उन-नवाज़िल/जि:६/पृ:३३९)

आज की मेरी एक छोटी सी नेकी
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आज की मेरी एक छोटी सी नेकी

पिछले दिसंबर एक रोज़ जब इंग्लैंड में शदीद (भारी) बर्फबारी हो रही थी और हर किसी को सर्दी ने जकड़ रखा था, तो मैंने अपने ऑफिस की खिड़की से देखा कि मेरा एक साथी इस मुंजमिद (जमा) कर देने वाली हवा में बाहर दस्ताने चढ़ाए और हाथ में बेलचा थामे रास्ते से लोगों के लिए बर्फ के ढेर (अम्बार) साफ़ कर रहा है.. मैं...

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