दाढ़ी तराशने और मुंडवाने वाले के यहाँ दावत खाना?
हदीस में आया है कि फ़ासिक़ लोगों की दावत क़ुबूल न की जाए और दाढ़ी मुंडवाने और तरशवाने वाले लोग भी चूंकि फ़ासिक़ हैं, इसलिए अगर मस्लेहत के ख़िलाफ़ न हो तो उन लोगों की दावत रद्द की जा सकती है। ख़ास कर जब कि दावत की मजलिस में मुनकिरात हों, तो मनाही का हुक्म और ताकीदी हो जाता है। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 16 / सफ़हा: 75)