मुहक्कक मसाला

क़ुरआन करीम की खुद तिलावत करने में जितना सवाब है वह टेलीविज़न वगैरह पर क़ुरआन सुनने से हासिल नहीं हो सकता, इसलिए इन चीज़ों से तिलावत सुनने के बजाय खुद अपनी तिलावत का एहतमाम करना चाहिए। (किताबुन नवाज़िल / जिल्द: 16 / सफ़हा: 446)

कलमा पढ़ी हुई मेम
लेख

कलमा पढ़ी हुई मेम

हमारे एक दोस्त थे; ज़ेहन (सोच) इस्लामी, लेकिन चेहरा-मोहरा ग़ैर-इस्लामी। हम सिर्फ़ उनके ज़ेहन पर ही अल्लाह का शुक्र अदा करते थे। मौसूफ़ (महोदय) कुछ समय के लिए इंग्लैंड तशरीफ़ ले गए, और जब उनकी वापसी हुई तो बगल में एक मेम (गोरी मेम) थीं! चूँकि मौसूफ़ का ताल्लुक एक पारंपरिक परिवार से था, इसलिए यह ख़...

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