मुहक्कक मसाला

क़ुरआन के बोसीदा (पुराने/जीर्ण) औराक़ (पन्नों) का क्या किया जाए?

क़ुरआन पाक जब बोसीदा होने की वजह से नाक़ाबिल-ए-इंतिफ़ाअ (इस्तेमाल के क़ाबिल न) रह जाए तो फ़ुक़हा-ए-हनफ़िया की तसरीह (स्पष्टीकरण) के मुताबिक़ सबसे बेहतर तरीक़ा यह है कि लहद (क़ब्र के अंदर बग़ली जगह) बनाकर उसमें दफ़न कर दिया जाए (रद्दुल मुहतार, जि: 4, पृ: 271)। अगरचे बहते पानी में डाल देने की भी इजाज़त है लेकिन यह ख़िलाफ़-ए-औला (बेहतर तरीक़े के ख़िलाफ़) है। इसी तरह जलाना भी साबित है जैसा कि अल्लामा सुयूती अलैहिर्रहमा ने नक़्ल किया है। लेकिन हज़रात-ए-हनफ़िया के नज़दीक यह ममनूअ (मना) है जैसा कि अल्लामा शामी ने तसरीह की है।

(किताब: हबीबुल फ़तावा / जि: 7 / पृ: 52)

एक वली की सच्ची भविष्यवाणी:
लेख

एक वली की सच्ची भविष्यवाणी:

हज़रत शाह अब्दुल रहीम साहब सहारनपुरी, जो बड़े साहिब-ए-कश्फ़-ओ-करामात (आध्यात्मिक रहस्य और चमत्कार वाले) थे, उनका एक वाक़िया बहुत मशहूर है कि पंजाब से हकीम नूरुद्दीन इलाज के सिलसिले में हज़रत शाह साहब के पास आए... हज़रत ने उनसे फ़रमाया कि "हकीम साहब! पंजाब में कोई जगह क़ादियान है, वहाँ से किसी ने नबु...

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