मुहक्कक मसाला

क़ुर्बानी का गोश्त बिना वज़न तक़्सीम करने का हुक्म।

बग़ैर वज़न के क़ुर्बानी के गोश्त को शूरका (साझेदारों) के दरमियान तक़्सीम करना जाइज़ नहीं। (और इसका गोश्त शूरका के दरमियान वज़न करके तक़्सीम किया जाए क्योंकि यह मौज़ून [वज़नी] है, न कि अंदाज़े से, क्योंकि तक़्सीम में तमलीक [मालिक बनाने] का मअना होता है, इसलिए अंदाज़े से जाइज़ नहीं [मुल्तक़ल अबहुर मअ मजमउल अनहुर, जि: 3, पृ: 517] और इसी तरह शामी में है)। (किताब: हबीबुल फ़तावा / जि: 4 / पृ: 257)

गुलाम का आका को हकीमाना (बुद्धिमत्तापूर्ण) तमाचा
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गुलाम का आका को हकीमाना (बुद्धिमत्तापूर्ण) तमाचा

जंग-ए-इस्कंदरिया (सिकंदरिया के युद्ध) में रूमी एक किले में बंद थे और मुसलमानों ने उस किले की घेराबंदी (محاصرہ) कर रखी थी। एक रोज़ रूमी मैदान में निकले और सिपहसालार हज़रत अम्र बिन अल-आस (रज़ियल्लाहु अन्हु) चंद सवारों को लेकर उनके मुक़ाबले हुए, घमासान की लड़ाई हुई। मुसलमान रूमियों को दबाते हुए बराबर क...

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