कसम खाते वक़्त कुरान करीम, तौरात या इंजील वगैरह मुक़द्दस (पवित्र) किताबों पर हाथ रखना कसम के सही होने के लिए लाज़िम (ज़रूरी) नहीं है, इन किताबों पर हाथ रखे बगैर भी कसम सही हो जाती है। लेकिन अगर कसम की ताकीद और कसम खाने वाला झूठी कसम न खाए, इस बात से उसे डराने के लिए ऐसा किया जाता है, तो इसकी इजाज़त है। (अल-फ़तावा अल-हिन्दिय्याह : 51,52/2) (माखूज़ अज़ : दरसी व इल्मी अहम मसाइल पृ: 314)