तकबीरात-ए-इंतिक़ाल का मसनून वक़्त यह है कि जहां से इंतिक़ाल (मुवमेंट) शुरू हो, वहीं से तकबीर भी शुरू हो, और जहां इंतिक़ाल ख़त्म हो वहीं तकबीर भी ख़त्म हो। अगर किसी रुकन (नमाज़ के पिलर) में पहुँचने के बाद भी तकबीर-ए-इंतिक़ाली ख़त्म न हुई, तो यह अमल ख़िलाफ़-ए-सुन्नत होने की वजह से मकरूह होगा। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 46)