मुहक्कक मसाला

तकबीरात-ए-इंतिक़ाल का मसनून वक़्त यह है कि जहां से इंतिक़ाल (मुवमेंट) शुरू हो, वहीं से तकबीर भी शुरू हो, और जहां इंतिक़ाल ख़त्म हो वहीं तकबीर भी ख़त्म हो। अगर किसी रुकन (नमाज़ के पिलर) में पहुँचने के बाद भी तकबीर-ए-इंतिक़ाली ख़त्म न हुई, तो यह अमल ख़िलाफ़-ए-सुन्नत होने की वजह से मकरूह होगा। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 46)

पूर्ण स्वतंत्रता का भ्रम: अभिनेत्री हुमैरा असगर की दर्दनाक कहानी
लेख

पूर्ण स्वतंत्रता का भ्रम: अभिनेत्री हुमैरा असगर की दर्दनाक कहानी

"तो हे आँख वालों! इबरत (सीख) हासिल करो।" यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" का नारा लगाते हैं। मर्जी भी उसी की थी और जिस्म भी उसी का था, मगर उसके बाद जो हुआ वह सन्नाटे से गूंजता हुआ एक कमरा था। बंद दरवाजे के पीछे महीनों से खामोश पड़ी एक लाश थी, और आस-पास न कोई रोने वाली आँख...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार