मुहक्कक मसाला

लिबास के बारे में शरीअत की तालीमात बड़ी मोतदिल हैं, शरीअत ने किसी मख़सूस लिबास को मुतअय्यन नहीं किया, अलबत्ता लिबास की हुदूद मुक़र्रर की हैं, जो लिबास इन शरई हुदूद में होगा वह लिबासे शरई कहलाएगा, वह हुदूद ये हैं:

नंबर (1): लिबास इतना छोटा और बारीक और चुस्त न हो कि वह आज़ा ज़ाहिर हो जाएं जिनका छुपाना वाजिब है।

नंबर (2): लिबास ऐसा न हो जिसमें कुफ़्फ़ार व फ़ुस्साक़ के साथ मुशाबहत हो।

नंबर (3): लिबास से तकब्बुर व तफ़ाख़ुर, इसराफ़ व तनअ'उम मुतरश्शह न होता हो, हाँ इसराफ़ व तनअ'उम और नुमाइश से बचते हुए अपना दिल ख़ुश करने के लिए क़ीमती लिबास पहनना जायज़ है।

नंबर (4): मर्द की शलवार, तहबंद और पाजामा टख़नों से नीचे न हो।

नंबर (5): मर्द का लिबास असली रेशम का न हो, क्योंकि वह हराम है।

नंबर (6): मर्द ज़नाना और औरतें मर्दाना लिबास न पहनें।

नंबर (7): ख़ालिस सुर्ख़ रंग का लिबास पहनना मर्दों के लिए मकरूह है, अलबत्ता किसी और रंग की आमेज़िश हो, या सुर्ख़ धारीदार हो तो कोई मुज़ायका नहीं। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 143)

कलमा पढ़ी हुई मेम
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