मुहक्कक मसाला

बिना शरई उज़्र (धार्मिक कारण) के जमात की नमाज़ को तर्क करना (छोड़ना) बहुत बड़ी महरूमी है, और इस्लाम के बड़े शआर (प्रतीक) को तर्क करना है। फ़ुक़हा-ए-किराम के नज़दीक इस जमात छोड़ने वाले की शहादत (गवाही) क़बूल नहीं की जाएगी और वह गुनहगार होगा। हदीस शरीफ़ में इस पर सख़्त वईदें (चेतावनियाँ) वारिद हुई हैं, नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: "उससे उसकी वह नमाज़ क़बूल नहीं की जाएगी जो उसने पढ़ी"। (अहम मसाइल / जिल्द: 1 / सफ़ा: 32)

हज़रत तल्हा के इस्लाम क़बूल करने का दिलचस्प वाक़िया
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हज़रत तल्हा के इस्लाम क़बूल करने का दिलचस्प वाक़िया

हज़रत तल्हा (रज़ियल्लाहु अन्हु) अपना इस्लाम क़बूल करने का वाक़िया (घटना) बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि: एक मर्तबा मैं बुसरा (بصری) के बाज़ार और मेले में मौजूद था, वहाँ एक पादरी अपने गिरजाघर की ऊपरी मंज़िल (बालो-ख़ाने) में रहता था। उसने एक दिन मेरे सामने लोगों से कहा, "इस बाज़ार और मेले वालों से पूछो...

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