मुहक्कक मसाला

जमाअत के वक़्त सुनन में मशग़ूल होना

जब जमाअत खड़ी हो तो सुन्नतों में मशग़ूल होना दुरुस्त नहीं, क्योंकि हुज़ूर ﷺ का इरशाद है: "जब जमाअत खड़ी हो तो फ़र्ज़ के अलावा दूसरी नमाज़ नहीं," हां अगर सुन्नत-ए-फ़ज्र की अदायगी में फ़ज्र के फ़ौत होने का अंदेशा न हो, यानी उसको इमाम के साथ एक रकअत मिल सकती है, या इमाम को क़अदा में पा सकता है, तो सुन्नत-ए-फ़ज्र अदा कर ले। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 33)

नबी करीम ﷺ विभिन्न सामाजिक रूपों में (पति, पिता, भाई, नाना, बेटा, ससुर और भतीजे के रूप में)
लेख

नबी करीम ﷺ विभिन्न सामाजिक रूपों में (पति, पिता, भाई, नाना, बेटा, ससुर और भतीजे के रूप में)

नबी करीम ﷺ पति के रूप में (बतौर शौहर): नबी करीम ﷺ अपने परिवार के साथ बहुत ही मोहब्बत से पेश आते थे। आपने इर्शाद फ़रमाया: "मैं तुममें से अपने परिवार के लिए सबसे बेहतर हूँ।" एक मर्तबा आप अपने घर तशरीफ़ लाए, उस वक़्त सैयदा आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) प्याले में पानी पी रही थीं... आपने दूर से फ़रमाया, "हु...

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