जमाअत के वक़्त सुनन में मशग़ूल होना
जब जमाअत खड़ी हो तो सुन्नतों में मशग़ूल होना दुरुस्त नहीं, क्योंकि हुज़ूर ﷺ का इरशाद है: "जब जमाअत खड़ी हो तो फ़र्ज़ के अलावा दूसरी नमाज़ नहीं," हां अगर सुन्नत-ए-फ़ज्र की अदायगी में फ़ज्र के फ़ौत होने का अंदेशा न हो, यानी उसको इमाम के साथ एक रकअत मिल सकती है, या इमाम को क़अदा में पा सकता है, तो सुन्नत-ए-फ़ज्र अदा कर ले। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 33)