नमाज़ में आस्तीन उतारना
अगर कोई शख़्स रकअत के फ़ौत होने के डर से जल्दी-जल्दी जमाअत में शामिल हो गया, और आस्तीनें ऊपर चढ़ी रह गईं, तो उसके लिए अफ़ज़ल यह है कि अपनी आस्तीनें कुछ क़ियाम में, कुछ रुकू में, कुछ क़ौमा में, कुछ सज्दा में और कुछ जलसा में अमल-ए-क़लील से उतारे, ऐसी सूरत इख़्तियार न करे कि अमल-ए-कसीर हो जाए और नमाज़ फ़ासिद हो जाए। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 56)