चटाई की टोपी पहन कर नमाज़ पढ़ना
अक्सर लोग हुसूल-ए-सवाब की नियत से चटाई की टोपियां नमाज़ियों के इस्तेमाल के लिए मस्जिदों में रखते हैं, चूंकि इंसान उन्हें पहन कर दीगर मजालिस में जाना पसंद नहीं करता, बल्कि मयूब समझता है, इसलिए ये टोपियां 'सियाब-ए-बज़ला' के हुक्म में हैं, लिहाज़ा ऐसी टोपियां पहन कर नमाज़ पढ़ना मकरूह-ए-तंज़ीही है। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 57)