मुहक्कक मसाला

चटाई की टोपी पहन कर नमाज़ पढ़ना

अक्सर लोग हुसूल-ए-सवाब की नियत से चटाई की टोपियां नमाज़ियों के इस्तेमाल के लिए मस्जिदों में रखते हैं, चूंकि इंसान उन्हें पहन कर दीगर मजालिस में जाना पसंद नहीं करता, बल्कि मयूब समझता है, इसलिए ये टोपियां 'सियाब-ए-बज़ला' के हुक्म में हैं, लिहाज़ा ऐसी टोपियां पहन कर नमाज़ पढ़ना मकरूह-ए-तंज़ीही है। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 57)

एक बोर्ड और दो वाक्य:
लेख

एक बोर्ड और दो वाक्य:

एक अंधा आदमी एक इमारत के पास बैठा था और पास में एक बोर्ड रखा था जिस पर लिखा था, "मैं अंधा हूँ, कृपया मेरी मदद करें।" साथ में उसकी टोपी पड़ी हुई थी जिसमें कुछ सिक्के थे। एक आदमी वहाँ से गुज़र रहा था। उसने अपनी जेब से कुछ सिक्के निकाले और टोपी में डाल दिए। अचानक उसकी नज़र बोर्ड पर पड़ी। उसने बोर्ड...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार