दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया।
दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन।
फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन।
तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं।
कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।
८. जब तुझे वह हादसा मौत का पेश आएगा जिसको कोई नहीं टाल सकता, तो माल-ओ-दौलत और नौकर-ओ-ख़ादिम तेरे कुछ भी काम न आएँगे।...