तुम तो सब्र (धैर्य) के कायल थे,
रज़ा-ए-रब (रब की इच्छा) पर...
Ummah Post
7 June, 2025

तुम तो सब्र (धैर्य) के कायल थे,

रज़ा-ए-रब (रब की इच्छा) पर मायल थे,

फिर ये शिकायतें कैसी?

कहो ये रंजिशें (गिले-शिकवे) कैसी?

हाँ, इंसानी फितरत (स्वभाव) मैं भी समझती हूँ,

कि एक गहरा दुख तो होता है,

कई आँसू मचलते हैं,

कई शिकवे पनपते हैं,

इब्तिराब (बेचैनी) मुसलसल (लगातार) है...

कई जज्बों की हलचल है...

मगर हर हाल में शुक्र अल्लाह का हलफ़ (कसम) जो तुमने उठाया था,

कहो... क्या उसको निभाया है?

क्या रब से बढ़कर मुख्लिस (सच्चा हितैषी) यहाँ

तुमने किसी को पाया है?

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एक बोर्ड और दो वाक्य:
लेख

एक बोर्ड और दो वाक्य:

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