"मैं जानता हूँ कि दिलासे के तमाम शब्द मिलकर भी दिल में बने ए...
Ummah Post
9 June, 2025

"मैं जानता हूँ कि दिलासे के तमाम शब्द मिलकर भी दिल में बने एक सूराख (छेद) को नहीं भर सकते, तो फिर तुम्हारे दिल का क्या हाल होगा जो छननी की तरह है, जिसके हर सूराख से कोई अज़ीज़ (प्रियजन) गुज़रा और चला गया।"

— अधम शरकावी

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