ग़म भी तेरी अता है, ख़ुशी भी तेरी अता,
काफी है बारगाह-ए-मोह...
Ummah Post
6 August, 2025

ग़म भी तेरी अता है, ख़ुशी भी तेरी अता,

काफी है बारगाह-ए-मोहब्बत से इन्तिसाब।

कफील-उर-रहमान निशात

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आज की मेरी एक छोटी सी नेकी
लेख

आज की मेरी एक छोटी सी नेकी

पिछले दिसंबर एक रोज़ जब इंग्लैंड में शदीद (भारी) बर्फबारी हो रही थी और हर किसी को सर्दी ने जकड़ रखा था, तो मैंने अपने ऑफिस की खिड़की से देखा कि मेरा एक साथी इस मुंजमिद (जमा) कर देने वाली हवा में बाहर दस्ताने चढ़ाए और हाथ में बेलचा थामे रास्ते से लोगों के लिए बर्फ के ढेर (अम्बार) साफ़ कर रहा है.. मैं...