*पता है उम्म-अल-यक़ीन (विश्वास की मां) क्या है???*
जब दिमाग की नसें सौ तरह की उलझनों में हों और कारणों (اسباب) की जगह सवालिया निशान नजर आए,,
उस समय इस बात पर यकीन करना कि अगर अल्लाह चाहे तो आग जला नहीं सकती, समंदर डुबो नहीं सकता, मछली के निगलने के बावजूद भी (वह) हजम नहीं कर सकती और अगर अल्लाह चाहे तो समंदर दो हिस्सों में बंट कर रास्ता दे दे... ❤️🩹🥰