ख़वातीन (महिलाओं) का सोशल मीडिया इस्तेमाल करते वक़्त बेहद मोहतात (सावधान) रहना ज़रूरी है, ख़ास तौर पर मर्दों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को फ़ॉलो करते वक़्त ख़ामोशी, अदब और सब्र-ओ-तहम्मुल (धैर्य) का मुज़ाहिरा करना (दिखाना) ज़रूरी है।
मेरी बहनो! आप मर्दों के सोशल मीडिया अकाउंट्स इस तरह से फ़ॉलो करें जैसे कि आप मौजूद ही नहीं हैं, उनके अकाउंट्स से फ़ायदा उठाएँ लेकिन फ़ितने से बचते हुए, उनके अकाउंट्स पर जाकर बेजा (बेवजह) कमेंट करने से गुरेज़ करें (बचें), इसी तरह बिला-वजह उनके तब्सिरों (टिप्पणियों) और कमेंट्स पर रिप्लाई देने से भी गुरेज़ करें, क्योंकि इस तरह करने से सभी की तवज्जो (ध्यान) आपकी जानिब (तरफ़) मबज़ूल हो (जा) सकती है, और आप फ़ितने का सबब (कारण) बन सकती हैं, इसलिए मर्दों के पोस्ट्स पर कमेंट करना इसी तरह उनके पोस्ट्स पर दिल या फूल या उन जैसे इमोजीज़ इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे आपकी इज़्ज़त, हया, तक़वा और आपके वक़ार (गरिमा) में कमी आ सकती है।
लिहाज़ा एहतियात बरतें, अपनी हया व वक़ार को बरक़रार रखें, और मर्दों के पोस्ट्स पर तब्सिरे या मर्दों के कमेंट्स मर्दों के लिए ही छोड़ दें।
उम्मे मुहम्मद ख़ुशनुमा मुसलेहुद्दीन
जामिया उमुल क़ुरा मक्का मुकर्रमा