*{इस्लाम से बगावत, कायनात (ब्रह्मांड) के शासक से बगावत है}*...
Ummah Post
By Mohd
6 November, 2020

*{इस्लाम से बगावत, कायनात (ब्रह्मांड) के शासक से बगावत है}*

यानी अल्लाह के नज़दीक इंसान के लिए सिर्फ एक ही जीवन-प्रणाली (निज़ाम-ए-ज़िंदगी) और एक ही जीवन-शैली सही और दुरुस्त है, और वह यह है कि इंसान अल्लाह को अपना मालिक और माबूद (पूज्य) स्वीकार करे और उसकी बंदगी व गुलामी में अपने आप को पूरी तरह सौंप दे, और उसकी इबादत का तरीका खुद ईजाद (आविष्कार) न करे; बल्कि उसने अपने पैगंबरों के माध्यम से जो हिदायत (मार्गदर्शन) भेजी है, बिना किसी कमी-बेशी (घटाने-बढ़ाने) के सिर्फ उसी का पालन करे। इसी सोच और अमल के तरीके का नाम "इस्लाम" है, और यह बात पूरी तरह सच है कि ब्रह्मांड का निर्माता और मालिक अपनी मख्लूक (सृष्टि) और प्रजा के लिए इस इस्लाम के अलावा किसी दूसरे तौर-तरीके को जायज़ स्वीकार न करे। आदमी अपनी मूर्खता (हमाक़त) से खुद को नास्तिकता (दहरियत) से लेकर शिर्क और मूर्तिपूजा तक हर विचारधारा और हर पंथ का पालन करने का हकदार समझ सकता है, मगर ब्रह्मांड के शासक (फरमांरवा-ए-कायनात) की नज़र में तो यह कोरी बगावत है।

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हज़रत तल्हा के इस्लाम क़बूल करने का दिलचस्प वाक़िया
लेख

हज़रत तल्हा के इस्लाम क़बूल करने का दिलचस्प वाक़िया

हज़रत तल्हा (रज़ियल्लाहु अन्हु) अपना इस्लाम क़बूल करने का वाक़िया (घटना) बयान करते हुए फ़रमाते हैं कि: एक मर्तबा मैं बुसरा (بصری) के बाज़ार और मेले में मौजूद था, वहाँ एक पादरी अपने गिरजाघर की ऊपरी मंज़िल (बालो-ख़ाने) में रहता था। उसने एक दिन मेरे सामने लोगों से कहा, "इस बाज़ार और मेले वालों से पूछो...