इस्लामी तारीख (इतिहास)
किस्त नंबर 9
हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम
हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम एक मशहूर नबी हैं, वह हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की वफ़ात (देहांत) से लगभग सौ साल बाद और हज़रत नूह अलैहिस्सलाम से एक हज़ार साल पहले शहर-ए-बाबिल (बाबुल शहर) में पैदा हुए थे। उन्होंने हज़रत शीस अलैहिस्सलाम से इल्म (ज्ञान) हासिल किया। इल्म-ए-नजूम (ज्योतिष/खगोल विज्ञान), इल्म-ए-हिसाब (गणित), सिलाई, नाप-तौल, असलाह साज़ी (हथियार बनाना), और फ़न-ए-तहरीर व किताब (लेखन और पुस्तक कला) के मोजिद (आविष्कारक) और बानी (संस्थापक) हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम हैं। उनके ज़माने में कई ज़बानें (भाषाएँ) बोली जाती थीं, अल्लाह तआला ने उन्हें सारी ज़बानें सिखाईं, चुनाँचे वह लोगों से उन्हीं की ज़बान में बातचीत किया करते थे। क़ुरआन पाक में उनका इस तरह ज़िक्र किया गया है कि वह बड़े सच्चे और सब्र करने वाले नबी थे। उनको क़ुर्ब-ए-ख़ुदावंदी (ईश्वर की निकटता) का ऊँचा मर्तबा (दर्जा) अता किया गया था। इतिहासकारों ने आपके अख़लाक़ (चरित्र) का तज़किरा इस तरह किया है कि गुफ़्तगू (बातचीत) में संजीदा, ख़ामोश तबीयत थे, चलते वक़्त ज़मीन पर निगाह रखते और बात करते वक़्त शहादत की उँगली (तर्जनी) से बार-बार इशारा फ़रमाते, पूरी ज़िंदगी दावत व तब्लीग़ (धर्म प्रचार) में गुज़ार दी।