रीवायतों में आता है कि रिज़्क़ सुबह की नमाज़ के बाद तक़सीम (वितरित) होता है और आमाल दिन के आख़िर में ऊपर उठाए जाते हैं; जो इंसान इन औक़ात (समयों) में अल्लाह की इताअत (आज्ञापालन) में मसरूफ़ (व्यस्त) रहेगा, उसके रिज़्क़ और अमल में बरकत अता की जाएगी... 🌹♥️🌹
हाफ़िज़ इब्न हजर असक़लानी (रह.)
(फ़त्हुल बारी, 2: 42)