सांस लेना नाक के ज़रिए ज़्यादा बेहतर है या मुंह के ज़रिए???...
Ummah Post
6 November, 2024

सांस लेना नाक के ज़रिए ज़्यादा बेहतर है या मुंह के ज़रिए???

नाक के ज़रिए सांस लेना ज़्यादा बेहतर है। नाक का विकास (इवोल्यूशन) सांस लेने के लिए ही हुआ है। हमारे नथुनों में बहुत से बाल और म्यूकस (बलगम/तरल) होते हैं जो धूल-मिट्टी के कणों और बैक्टीरिया आदि को फ़िल्टर करते हैं और फेफड़ों तक नहीं पहुंचने देते। इसके अलावा, नाक से सांस लेने के दौरान हवा का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो जाता है, जिससे फेफड़ों को बाहरी तापमान पर हवा का सामना नहीं करना पड़ता। खास तौर पर सर्दियों में जब हवा ठंडी और सूखी होती है, नाक से सांस लेने से फेफड़ों तक पहुंचते-पहुंचते हवा नम (मॉइश्चराइज) भी हो जाती है, इसलिए फेफड़ों में नमी का अनुपात सही रहता है...

मुंह से सांस लेने से मुंह सूख जाएगा, और काफी सारी धूल-मिट्टी अंदर चली जाएगी...

Share this article
कलमा पढ़ी हुई मेम
लेख

कलमा पढ़ी हुई मेम

हमारे एक दोस्त थे; ज़ेहन (सोच) इस्लामी, लेकिन चेहरा-मोहरा ग़ैर-इस्लामी। हम सिर्फ़ उनके ज़ेहन पर ही अल्लाह का शुक्र अदा करते थे। मौसूफ़ (महोदय) कुछ समय के लिए इंग्लैंड तशरीफ़ ले गए, और जब उनकी वापसी हुई तो बगल में एक मेम (गोरी मेम) थीं! चूँकि मौसूफ़ का ताल्लुक एक पारंपरिक परिवार से था, इसलिए यह ख़...